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निर्गुण प्रेम एक बार मैंने पूछा था ये निर्गुण क्या है ? तुमने कहा था निर्गुण प्रेम है । जैसे गन्ने में शक्कर का घुले रहना , गु...Read More
यादें : भीमसेन
ख्वाहिश थी ब रसों से लफ़्ज़ों में रह गई जो करूँ उसे बयान दिल से तुम जो दूर मुझसे और मैं हूँ उलझा तुममें एक अहसास था अपनेपन का अब...Read More
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जनवरी 06, 2021
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जनवरी 06, 2021
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महाभारत : दीपक पंथ
आज कल में, यत्र – तत्र और सर्वत्र ही, द्वापर युग की तरह, कौरव और पाण्डव के बीच, महाभारत का युद्ध, होते हुए देख रहा हूँ । यहाँ हज...Read More
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जनवरी 04, 2021
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जनवरी 04, 2021
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दरवाज़ा बंद करते जाना........धड़ाक.... ! : रोजी कामै
दरवाज़ा बंद करते जाना........धड़ाक.... ! शांति है यहाँ अब ....... बिल्कुल असमय चले गए ...... जल्दी थी ! ठहर कर जाते ...... पता तो लगता तुम...Read More
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जनवरी 04, 2021
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जनवरी 04, 2021
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वास्तविक परीक्षा : सन्तोष लुईंटेल
परीक्षा के दिन सब अपनी लेखनी और पुस्तिका संभाले दे रहें हैं प्रश्नों के उत्तर प्रश्न समाधान से परे, सोचने पर मजबूर करता । सर ...Read More
वास्तविक परीक्षा : सन्तोष लुईंटेल
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जनवरी 04, 2021
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जनवरी 04, 2021
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तुम मौजुद नहीं थे : शरदचाँद थियाम
अनवरत कहानी की धारा में बहने वाली असंख्य घटनाओं में तुम मौजुद नहीं थे । पढ़ जाऊँ तुम्...Read More
तुम मौजुद नहीं थे : शरदचाँद थियाम
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जनवरी 04, 2021
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दुनिया का मेला : सविता लाइमयुम
पाँच उंगलियाँ, पाँच आत्मा पाँच अर्घ्य, पाँच इन्द्रियाँ पाँच- पाँच का जत्था साया मिलाकर हुआ छः तत्व जिससे निर्मित मानव देह-प्राण सृष्टिकर्ता ...Read More
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जनवरी 04, 2021
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जनवरी 04, 2021
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नोङमा लाक्खी : राजकुमारी देवऋता
एक दिन खोजा सरे बाजार में खोजा काङजैबुङ 1 में खोजा इम्फाल बुक-फेयर में खोजा कोमबिरै गार्डन में खोजा मोइराङ लाइ हराओबा 2 में खोजा सङाई फे...Read More
नोङमा लाक्खी : राजकुमारी देवऋता
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जनवरी 04, 2021
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जनवरी 04, 2021
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येङ्ङू नोङ चूरे : मेमचौबी
देखो पानी बरस रहा देखो पानी बरस रहा है घने पेड़ो के बीच हरिताभ जंगल में ओझल होती ढालू पर्वत श्रृंखला लहरी पर देखो लहरा रही बारिश ...Read More
येङ्ङू नोङ चूरे : मेमचौबी
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जनवरी 04, 2021
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